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CRPF कब किसी का एनकाउंटर कर सकती है ?

CRPF कब किसी का एनकाउंटर कर सकती है या कहें कि गोली मार सकती है? दोस्तों आपने बहुत सारी ऐसी एनकाउंटर से संबंधित घटनायेें सुनी होंगी या टीवी / इंटरनेट पर देखा होगा जिसमें बताया जाता है कि CRPF और आतंकवादियों या नक्सलियों में मुठभेड़ के दौरान आतंकी मार गिराये लेकिन आप यह नहीं जानते होंगे कि CRPF किसका एनकाउंटर कर सकती है और कब कर सकती है। आज इस पोस्ट में आप यही जानेंगे कि CRPF कब किसी का एनकाउंटर कर सकती है ? इससे पहले हम जानेंगे कि –

पुलिस कब किसी का एनकाउंटर कर सकती है?

दोस्तों सबसे पहली बात कि CRPC के सेक्शन 46 में बताया गया है कि पुलिस किसी व्यक्ति को कैसे गिरफ्तार करेगी या गिरफ्तार करने की प्रकिया बतायी गयी है।

धारा 46 के अन्दर यह भी बताया गया है कि पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है तो ऐसी स्थिति के अन्दर अगर कोई व्यक्ति पुलिस की गिरफ्तारी से बचने का प्रयत्न करता है या उसका विरोध करता है तो पुलिस को यह अधिकार है कि वह उसके पास जो भी आवश्यक साधन हैं सभी का इस्तेमाल कर सकती है। यानि ऐसे व्यक्तियों को गिरफ्तार करते समय पुलिस बल का प्रयोग भी कर सकती है।

अगर कोई व्यक्ति जिस पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास वाले अपराध का आरोप हो यानि उस व्यक्ति ने ऐसा अपराध किया है जिसमें उसको कोर्ट के माध्यम से मृत्युदंड भी हो सकता है या फिर आजीवन कारावास भी हो सकता है।

CRPF Encounter Techzinkk

ऐसे व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार कर लेती है और गिरफ्तारी के बाद वह व्यक्ति भागने का प्रयत्न करता है या प्रयास करता है तो पुलिस ऐसे व्यक्ति पर गोली चला सकती है।

एनकाउंटर का जो शब्द है वह आपको पूरी CRPC में IPC में कहीं नहीं मिलेगा और जब भी आप देखेंगे तो पुलिस यही बोलती है कि मुठभेड़ में मार गिराया। दोस्तों पुलिस उसी व्यक्ति को मारेगी पुलिस जिस पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास का आरोप हो।

एक मख्खी सिंह बनाम दिल्ली प्रशासन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जजमेंट दिया है कि पुलिस ने एक व्यक्ति को चोरी के आरोप में पकड़ा और वह पुलिस की कस्टडी से निकल भागा तो ऐसे मामले में पुलिस उस व्यक्ति पर गोली नहीं चला सकती है, क्योंकि चोरी में तीन साल की सजा का प्रावधान है या हम कहें कि चोरी में आजीवन या मृत्युदंड का प्रावधान नहीं है इसिलये पुलिस उस व्यक्ति पर गोली नहीं चला सकती है।

दोस्तों आप समझ गये होंगे कि पुलिस किसका एनकाउंटर कर सकती है और कब कर सकती है।

CRPF के जवान को किसे गोली मारने का अधिकार है?

दोस्तों देखा जाये तो कोई भी फोर्स का जवान हो चाहे आर्मी हो या CRPF या पुलिस बिना किसी बात के किसी को भी गोली मारने का अधिकार नहीं है। जब भी कोई आतंकवादी गतिविधियां होती हैं या इंटेलीजेंस के माध्यम से सूचना मिलती है कि किसी जगह पर आतंकवादी या नक्सली हमला करने वाले हैं तो ऐसी स्थिति में उस क्षेत्र की सिविल पुलिस को सूचना देकर उनके साथ ऑपरेशन चलाया जाता है। ऑपरेशन के दौरान सभी जवानों को आतंकवादियों या नक्सलियों को गोली मारने का आदेश होता है।

CRPF Encounter

यह ऑपरेशन क्षेत्रीय पुलिस की निगरानी में होता है उन्हें CRPF द्वारा पहले ही सूचित कर दिया जाता है कि उन्हें किसी क्षेत्र में ऑपरेशन चलाना है जिसमें किसी आतंकवादी का जिक्र होता है। आतंकवादी हमेशा फोर्स को नुकसान पहुचाने की फिराक में रहते हैं। श्रीनगर में आये दिन ऑपरेशन चलाये जाते हैं और जवानों द्वारा गोलियां चलायी जाती हैं।

CRPF के जवानों को गोली चलाने का आदेश उनके वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दिया जाता है। यदि उनका अधिकारी फायरिंग का आदेश नहीं देता है तो कोई भी जवान गोली नहीं चला सकता है।

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यदि कोई जवान किसी मुसीबत में फंस जाता है और यदि वह मजबूरन अपनी आत्मरक्षा के लिये यदि गोली चला देता है तो वह खुद भी फंस सकता है जब तक कि सामने वाले पर कुछ ऐसा न मिले जिससे साबित हो कि वह आतंकवादी था एवं उस जवान को नुकसान पहुंचाने वाला था जैसे कि जिस व्यक्ति पर गोली चलायी गयी है, उस पर हथियार का होना, ग्रेनेड का होना आदि।

उम्मीद है आपको यह पोस्ट अच्छी लगी होगी। अपनी राय कमेंट करें।

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